By मनीष सोनी




11 दिसम्बर को जब छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के नतीजे आएंगे तो उसी के साथ ये साफ हो जाएगा कि छत्तीसगढ का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा। मुख्यमंत्री के तौर पर अपनी हैट्रिक पूरी कर चुके डॉक्टर रमन सिंह या कोई और ?

राज्य निर्माण के बाद इस प्रदेश ने केवल दो मुख्यमंत्री देखे हैं। 3 साल के लिए अजीत जोगी फिर तीन बार के लिए डॉक्टर रमन सिंह। अगर जनता सत्ता पर कांग्रेस के बैठने का फैसला सुनाती है तो कई नेता हैं जो राज्य के तीसरे मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेना चाहते हैं।

अगर भाजपा तीसरी बार जीतती है तो डॉक्टर रमन सम्भवतः चौथी बार मुख्यमन्त्री बनेंगे। हालांकि इस कुर्सी पर भाजपा के कई नेता नज़रें गड़ाकर बैठे हैं। हालांकि पार्टी सुप्रीमो अमित शाह ने राजनांदगांव में रमन सिंह को अगले मुख़्यमंत्री के तौर पर प्रचारित करके वोट मांगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बड़े चेहरे के बाद भी बीजेपी ने सिर्फ रमन के चेहरे को आगे रखते हुए चुनाव लड़ा है। सम्भावना है बीजेपी सत्ता में आती है तो कम से कम उन्हें लोकसभा चुनाव तक आलाकमान छूने का जोखिम भी नहीं ले सकती।

फिर भी, भाजपा की राष्ट्रीय महामंत्री सरोज पांडेय और बृजमोहन अग्रवाल भी इस रेस के सदाबहार दावेदार माने जाते हैं। बृजमोहन अग्रवाल से जब पूछा गया था कि सरकार आने के बाद मुख्यमंत्री कौन होगा, तो उन्होंने कहा था कि विधायक दल का नेता मुख्यमंत्री का चुनाव करता है।  सरोज पांडेय पार्टी में राष्ट्रीय महामन्त्री हैं। केंद्रीय नेतृत्व का उन पर ज़बरदस्त भरोसा है। इस नाते सरोज के समर्थक उन्हें मुख्यमंत्री बनते देखना चाहते हैं। 

Ajit JogiAjit Jogi

जेसीसी भी अजीत जोगी को मुख्ममंत्री बनाने के लिए अपना गणित बिठाने में लगी है। पार्टी का आकलन है कि कांग्रेस या बीजेपी में से अपने बूते कोई पार्टी सत्ता में नहीं आ रही है। ऐसी सूरत में उसे हालात कर्नाटक जैसे होने की आस है। ये मानते हुए जेसीसी ने चुनाव होते ही अपने और बसपा के सम्भावित विजेताओं को एकजुट रखने की रणनीति को अमलीजामा पहना दिया है।

भाजपा और जेसीसी के येन-केन सत्ता में आने पर मुख्यमंत्री पद को लेकर रस्साकशी नहीं। लेकिन अगर सरकार कांग्रेस की आती है तो मुख्यमंत्री पद के लिए घमासान मचने के पूरे आसार हैं।

दरअसल, कांग्रेस में कई दिग्गज हैं, जिनके बीच सत्ता को लेकर संग्राम छिड़ सकता है। कांग्रेस में इस पद के लिए करीब एक दर्जन दावेदार हैं। मुख्यमंत्री पद के कई दावेदार इस पद की लालसा बरसों से पाले हुए हैं। कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद के चार नेताओ को मुख्य दावेदार माना जा रहा है। चरणदास महंत, भूपेश बघेल, टीएस सिंहदेव और ताम्रध्वज साहू।

Bhupesh BaghelBhupesh Baghel

भूपेश बघेल- कांग्रेस सत्ता में आती है तो मुख्यमंत्री पद के एक दावेदार भूपेश भी हैं। उनकी दावेदारी का आधार पांच साल तक प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर उनका काम है। भूपेश बघेल की छवि आक्रामक नेता की है और इस छवि के सहारे उन्होंने कांग्रेस को धार दी। विपक्ष में रहते हुए भूपेश ने अपने आक्रामक अंदाज़ से रमन सरकार को हर मोर्चे पर घेरा। वे आरएसएस पर हमला करने के मामले में बेहद मुखर रहे। भूपेश ने अपने निशाने पर मुख्यमंत्री रमन सिंह को रखा। जिससे पार्टी के कार्यकर्ता बेहद चार्ज रहे। पांच साल के दौरान भूपेश ने लगभग पूरे प्रदेश को पदयात्रा करके नाप लिया। कम संसाधन में भी पार्टी का संगठन मज़बूत करते हुए बूथ स्तर तक पहुंचा दिया। उन पर व्यक्तिगत हमले हुए तो दृढ़ता से उसका सामना किया और सरकार को बैकफुट पर धकेला। कांग्रेस प्रेक्षक मानते हैं कि लोकसभा चुनाव में भी इसी धार के साथ वे पार्टी का नेतृत्व करने में सक्षम हैं ।

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टीएस सिंहदेव- टीएस सिंहदेव की सौम्य नेता की  छवि उन्हें मुख्यमंत्री पद का दावेदार बनाती है। पार्टी ही नहीं पार्टी के बाहर भी अपने व्यवहार को लेकर उनकी स्वीकार्यता है । घोषणापत्र बनाने के लिए टीएस सिंहदेव ने बेहद मेहनत की है। उन्होंने हर ज़िले में लोगो से मुलाक़ात करके उनकी राय जानी और लोक-लुभावन घोषणापत्र तैयार किया। पांच साल तक पार्टी अध्यक्ष भूपेश बघेल के साथ सरकार से लड़ते रहे। हालांकि कांग्रेस में भूपेश विरोधी नेता उनके साथ लामबंद हो सकते हैं। चुनाव के दौरान पार्टी की ओर से सक्रिय प्रचार किया। दिल्ली की कांग्रेस की राजनीति में राजपरिवार संपर्कों से पहुँच भी उनके पक्ष में है।

Dr. Charan Das MahantDr. Charan Das Mahant

चरणदास महंत- अपनी वरिष्ठता और पार्टी के प्रति निष्ठा की वजह से इस पद के दावेदार हैं। वे गांधी परिवार के नज़दीकी हैं। पूर्व केंद्रीय मन्त्री रह चुके हैं। 2013 में जब झीरम घाटी में प्रदेश लीडरशिप को नक्सलियों ने खत्म कर दिया था। तब इस नाज़ुक घड़ी में चरणदास महंत पर ही पार्टी ने भरोसा किया था। हालांकि तब कांग्रेस सरकार नहीं बना पाई थी । दावेदारों के बीच घमासान छिड़ने पर भी महंत की लॉटरी खुल सकती है।

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ताम्रध्वज साहू- बेहद लोप्रोफाइल नेता। प्रदेश के सबसे बड़े ओबीसी वोटबैंक 'साहू' को लोकसभा चुनाव में साधने के लिए ताम्रध्वज साहू को प्रदेश की कमान दी जा सकती है। ताम्रध्वज को आख़िरी समय में पार्टी में विधानसभा चुनाव के समर में उतारकर एक संकेत भी दिया। राहुल गांधी से उनकी नज़दीकी भी उनकी सम्भावना को बढ़ाती है।