रायपुर विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के मौके पर माय अगला कदम संस्था द्वारा सिटी सेंट्रल मॉल में आत्महत्या निषेधक वर्कशॉप की गई, जिसका शीर्षक था "अन म्यूट योर सेल्फ" मतलब खुलकर बोलिये। इस वर्कशॉप में 50 से ज्यादा डॉक्टर्स, शिक्षाविद, मनोवैज्ञानिक, मनोचिकित्सक, प्रोफेसर और मनोविज्ञान, सोशल वर्कर्स के विद्यार्थी मौजूद थे, इस वर्कशॉप की अध्यक्षता डॉ. जे सी अजवानी और मुख्य अतिथि आरजी भावे ने की। डॉ. अजित वरवंडकर ने बताया कि इस दिन का उद्देश्य आत्महत्या के जोखिमों के बारे में जागरूकता बढ़ाना और आत्महत्या की रोकथाम गतिविधियों का बढ़ावा देना है। इसका उद्देश्य आत्महत्याओं को रोकने के लिए दुनिया भर में प्रतिबद्धता और कार्रवाई प्रदान करना है।

डॉ. वर्षा वरवंडकर ने बताया कि हर 40 सेकंड में, पूरे विश्व में कोई ना कोई व्यक्ति आत्महत्या कर रहा है। आज भारत में मानसिक अवसाद की दर 36% से बढ़ रही है। एक रिसर्च के अनुसार देश में हर चौथा व्यक्ति मानसिक रोग से पीड़ित है तथा हर परिवार में कम से कम एक सदस्य किसी ना किसी प्रकार के मानसिक उलझन में गहरी तरह ग्रसित है।

डॉ. भावे ने आत्महत्या रोकने के लिए बताया कि 95% व्यक्ति जो कि आत्महत्या करता है उसकी वजह ये होती है कि उसके मन की बात किसी ने नहीं सुनी या फिर वह किसीको अपनी बात नहीं कह सका। डॉ आजवानी ने बताया कि सुसाइड इनिसिएशन से कमिटमेंट का दौर बहुत नाज़ुक होता है, जब व्यक्ति ऐसे दौर से गुजरता होता है, तब अगर कोई उसकी बात अगर सुन ली जाए तो आत्महत्या की दुर्घटना रोकी जा सकती है, ऐसा इसलिए भी क्योंकि 90% लोग जो आत्महत्या का प्रयास करता है, दरअसल मारना नहीं चाहता।

आत्महत्या की प्रवृति रोकने के लिए ये स्टेप्स सुझाए गए

  1. मानसिक अवसाद से ग्रसित व्यक्तियों को पहचानना सीखें
  2. जब पहचान हो जाए तो, ऐसे लोगों से पेश आने का वैज्ञानिक तरीका सीखें
  3. दूसरों की मदद करने से पहले खुद का मानसिक स्वास्थ्य बेहतर बनाए रखें
  4. मानसिक स्वास्थ्य संबंधित चर्चा खुल के करें