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नई दिल्ली। 21 जून शुक्रवार को पूरी दुनिया योग दिवस मनाएगी। इस साल पीएम मोदी रांची मे करीब 20,000 लोगों के साथ योगाभ्यास करेंगे। इसकी तैयारियां पूरी हो चुकी हैँ। कल पूरा विश्व भारत के साथ योग दिवस मनाएगा।

कैसे हुई योग दिवस की शुरुआत

प्रधानमंत्री की कोशिशों की वजह से आज अंतर्राष्ट्रीय  योग दिवस मनाया जाता है। प्रधानमंत्री मोदी ने साल 2014 मे यूएन जनरल असेम्ब्ली मे अपने भाषण के दौरान योग का जिक्र किया था। प्रधानमंत्री के इस पहल को दुनिया के कई नेताओं ने सपोर्ट किया था। जब योग दिवस का प्रस्ताव यूएन मे रखा गया तब 177 देशों ने उस प्रस्ताव का समर्थन किया था, जो अपने आप मे एक रिकॉर्ड है। पहला अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 15 जून 2015 को मनाया गया। उस दौरान करीब 36,000 लोगों ने दिल्ली के राजपथ मे प्रधानमंत्री मोदी के साथ योग किया था।

21 जून की तारीख़ ही क्यों..

दरअसल, इस दिन का अपना महत्त्व है। प्रधानमन्त्री मोदी ने 2014 में संयुक्त राष्ट्र महासभा को अपने सम्बोधन मे बताया कि 21 जून उत्तरी गोलार्थ का सबसे लम्बा दिन होता है। इस दिन सूर्य जल्दी उगता है और सबसे देर मे अस्त होता है। इसके आलावा 21 जून ग्रीष्मकालीन संक्रांति का दिन भी होता है। इसीलिए 21 जून अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के लिए सबसे अच्छा दिन माना गया।

क्या है इस साल की थीम

योग दिवस हर साल,किसी थीम के साथ मनाया जाता है. इस साल इसकी थीम है ' पर्यावरण के लिए योग  yoga for climate action ' इस अवसर पर 21 जून को संयुक्त राष्ट्र मे भी मनाया जाएगा।

प्रधानमंत्री मोदी रांची मे करेंगे योग

इस साल योग दिवस के दिन प्रधानमंत्री मोदी, रांची मे रहेंगे और 18000 से ज़्यादा लोगों के साथ योग करेंगे। उनके साथ झारखंड के मुख्यमंत्री रघुबर दास भी मौजूद रहेंगे।

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ईद पर दोस्तों की शानदार दावत में अक्सर सेवाइयां या शीर खुरमा ही परोसा जाता है. जबकि ईद-उल-फितर में कई डिश भी बनाई जाती हैं जिनका स्वाद एक बार जुबान पर चढ़ जाए तो सालों-साल नहीं उतरता. अगर इस ईद पर आपने इन 5 व्यंजनों का जायका नहीं लिया तो समझ लीजिए आपका त्योहार अधूरा रह गया.

मीठी सिवइयां-

मीठी ईद पर सिवइयां लगभग सभी मुस्लिम परिवारों में बनाई जाती है. मैदे से बनी सिवइयां को दूध में बनाया जाता है. इसमें कई तरह के ड्राई फ्रूट्स भी डाले जाते हैं.

शीरमाल-

शीरमाल मैदे, घी और शक्कर से बनी मीठी रोटी को कहते हैं. शीर का मतलब होता है दूध. बाजार में पहले से तैयार मिलने वाले शीरमाल को गोश्त के साथ भी खाया जाता है. इसका स्वाद बटर में तले पाव जैसा होता है.

ईद पर बनने वाली डिशेज में बाकरखानी भी काफी स्पेशल है. यह मैदे, सूखे मेवे और मावे की बनती है. तंदूर या ओवन में सिकी बाकरखानी को सूखे मेवे, किशमिशस और काजू के साथ परोसा जाता है. इसे दूध के साथ भी खाया जाता है.

अंगूरदाना-

बाकरखानी-

अंगूरदाना उड़द की दाल से बनने वाली मोटी बूंदी है. यह मीठी होती है. इसे दूसरे सभी व्यंजनों के साथ परोसा जाता है.

दूध फेनी-

ईद पर सिवइयां और फेनी अच्छे-अच्छों के मुंह में पानी ला देती है. सिवइयों और फेनी में बुनियादी फर्क यह है कि फेनी तार के गुच्छे की तरह होती है. इसे बनाने में ज्यादा मेहनत लगती है. इसे घी में तला जाता है. यह रंगीन भी मिलती है.

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नई दिल्ली जानलेवा निपाह वायरस भारत में आ चुका है। केरल में पहला मामला सामने आया है। कोच्चि में 23 साल के एक छात्र दिमागी बुखार यानि निपाह वायरस से संक्रमित हुआ है। राज्य की स्वास्थ्य मंत्री के के शैलजा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस बात की पुष्टि की है।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान ने पुष्टि की कि 23 साल का छात्र के खून में निपाह वायरस पाया गया है। उन्होंने आगे कहा कि घबराने की जरूरत नहीं है, पुष्टि से पहले ही सरकार ने एहतियात बरतनी शुरू कर दी थी। उन्होंने बताया कि निपाह के शक के 86 मामले आए थे, जिनमें से 2 को भर्ती करवाया गया। इनमें से 1 की पुष्टि हो गई है और 1 मरीज के खून के सैंपल जांच के लिए भेज दिए गए हैं। वहीं, पीड़ितों की देखभाल में लगी नर्सों को भी गला खराब और बुखार की शिकायत हुई है।

निपाह से संक्रमित छात्र एर्नाकुलम जिले का रहने वाला है और इडुक्की जिले में स्थित थोडुपुज़ा के कॉलेज में पढ़ता है। वह हाल में शिविर के संबंध में त्रिशूर में था। त्रिशूर की जिला चिकित्सा अधिकारी डॉ रीना के मुताबिक, छात्र सिर्फ चार दिन ही त्रिशूर में था और उसे बुखार आ रहा था।

निपाह एक तरह का दिमागी बुखार है, जिसका संक्रमण तेजी से फैलता है। संक्रमण होने के 48 घंटे के भीतर यह व्यक्ति को कोमा में पहुंचा देता है। इसकी जद में जो भी व्यक्ति आता है उसे सांस लेने में दिक्कत के साथ सिर में भयानक पीड़ा और तेज बुखार होता है। कहा जाता है कि इस वायरस की पहचान 1998 में सबसे पहले मलेशिया में हुई थी। उस वक्त इस बीमारी की चपेट में 250 से अधिक लोग आए थे। 40 फीसदी से अधिक लोगों की मौत हो गई थी।'

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नई दिल्ली भारत में हर साल वायु प्रदूषण से 12 लाख लोगो की मौत के आगोश में चले जाते हैं। हर साल 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है। जिस तरह से पर्यावरण का स्तर लगातार खराब होता जा रहा है उससे तो यह महज रस्म ही लगता है। स्टेट ऑफ ग्लोबल एयर 2019 की रिपोर्ट के अनुसार वायु प्रदूषण से करीब 50 लाख लोगों की मौत हुई।

स्टेट ऑफ ग्लोबल एयर 2019 की ओर से जारी रिपोर्ट के अनुसार, भारत में वायु प्रदूषण से मौत का आंकड़ा स्वास्थ्य संबंधी कारणों से होने वाली मौत को लेकर तीसरा सबसे खतरनाक कारण है। देश में सबसे ज्यादा मौतें सड़क हादसों और मलेरिया के कारण होती है।  घर के भीतर या लंबे समय तक बाहरी वायु प्रदूषण से घिरे रहने की वजह से 2017 में स्ट्रोक, शुगर, हर्ट अटैक, फेफड़े के कैंसर या फेफड़े की पुरानी बीमारियों के कारण वैश्विक स्तर पर करीब 50 लाख लोगों की मौत हुई।

यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो की एनर्जी पॉलिसी इंस्टीट्यूट के अनुसार अगर धरती पर वायु प्रदूषण के स्तर पर सुधार आ जाए तो वैश्विक स्तर पर हर शख्स की उम्र में 2.6 साल बढ़ सकती है। भारत और चीन की बात करें तो वायु प्रदूषण से बेहाल चीन ने इस पर लगाम कसने के लिए कई बड़े फैसले लिए है। धुआं निकालने वाले कारखानों और वाहनों के इस्तेमाल पर रोक लगाई, जिससे कुछ हद तक कुछ हद तक सुधार आयें है। 

अब भारत की बात करें, तो यहां पर राजधानी दिल्ली समेत कई शहरों में वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर को भी पार कर गया है। भारत में जीवन-प्रत्याशा (लाइफ एक्सपेक्टेंसी) में 5.3 साल की कमी आई है। दिल्ली से सटे 2 शहरों (हापुड़ और बुलंदशहर) की बात करें तो यहां पर जीवन-प्रत्याशा की दर में निराशाजनक कमी आई है और यहां पर 12 साल से भी ज्यादा कम हो गई है, जो दुनिया में किसी भी शहर की तुलना में सबसे ज्यादा है।

2017 में 50 लाख लोगों की मौत

ग्लोबल बर्डन ऑफ डिसीज के अनुसार, 2017 में प्रति 1 लाख की आबादी में वायु प्रदूषण के कारण सबसे ज्यादा मौत (65.85) के लिए प्रदूषण के 3 कारक ज्यादा जिम्मेदार रहे। सबसे ज्यादा मौत (38.15) आउटडोर प्रदूषण यानी चिमनी, वाहनों और आग से निकलने वाले धुएं से फैले प्रदूषण के कारण हुई। इसके बाद घर से निकलने वाले प्रदूषण (21.47) और ओजेन क्षरण (6.23) के कारण सबसे ज्यादा मौतें हुईं।

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वाहिद खान
मनोरा। विकास खण्ड होने के नाते मनोरा में उप स्वास्थ्य केंद्र में बीएमओ कार्यलय और उप स्वास्थ्य केंद्र की स्थापना भले ही कर दि गई है लेकिन यहाँ स्वास्थ्य संसाधनों की तत्काल सुविधा विकास खण्ड स्तर पर ही मिलने वाली हैं। ट्रांसफार्मर नही होने की वजह से लोगो को स्वास्थ्य सुविधा नही मिल रही है। यहां ट्रांसफार्मर लगाने के लिए आवेदन बिजली विभाग को दिए हुए 5 महीने बीत चुकी हैं। फिर आज तक ट्रांसफार्मर नही लग सका है। स्वास्थ्य केंद्र में ट्रांसफॉर्मर नही होने से अभी तक लोगो को एक्सरे का सुविधा नहीं मिल पा रही हैं। जिसके वजह से लोगो को एक्सरे के लिए जशपुर जाना पड़ रहा है। वहीं लाखों रुपए की एक्सरे मशीन धूल कहा रही है। स्वास्थ्य केंद्र में लगभग 40 पंचायात के लोग इलाज के लिए आते हैं।

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