हेल्थ / लाइफस्टाइल

छत्तीसगढ़

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रायपुर । स्‍वाइन फ्लू से छत्‍तीसगढ़ में मौत की खबर है। इस मौत की खबर ने लोगों को इस वजह से भी डरा दिया है क्‍योंकि जिनकी मौत हुई वो खुद स्‍वास्‍थ्‍य विभाग में अधिकारी थे। जानकारी के मुताबिक स्‍वास्‍थ्‍य विभाग के ज्‍वाइंट डायरेक्‍टर रहे महेंद्र जंघेल  की मौत हो गई।

स्‍वाइन फ्लू की वजह से इनकी तबीयत अचानक कुछ ज्‍यादा ही बिगड़ना बताया जा रहा है। स्‍वास्‍थ्‍य विभाग की ही रिपोर्टिंग करने वाले कुछ पत्रकारों ने बताया कि प्रदेश में कुछ महीने से स्‍वाइन फ्लू को लेकर चर्चा भी इसे लेकर विभागीय अलर्ट जारी महेंद्र जंघेल  ने ही किया था। अब इस मौत से उनका पूरा परिवार और उन्‍हें जानने वाले सकते में हैं।

जानें क्‍या है स्‍वाइन फ्लू
यह एक संक्रमण बीमारी है जो इंसान से इंसान को लगती है. जब कोई स्वाइन फ्लू का मरीज छींकता है तो उसके आसपास 3 फीट की दूरी तक खड़े व्यक्तियों के शरीर में इस फ्लू का वायरस प्रवेश कर जाता है. अतः आप मरीज से कम से कम 6 फीट की दूरी बना कर रखें.

यदि कोई व्यक्ति अपने छींकते समय मुंह और नाक को हाथ से ढक लेता है तो फिर यदि वह जहां कहीं भी उस हाथ को लगाता है (दरवाजे, खिड़कियां, मेज, कीबोर्ड इत्यादि) वहां यह वायरस चिपक जाता है और फिर वहां से किसी अन्य व्यक्ति के हाथों पर लगकर शरीर में दाखिल हो जाता है.

आप इन निम्‍नलिखित बातों का ध्‍यान रख कर फ्लू को खुद से दूर रख सकते हैं:
1. छींकते समय टिश्यू पेपर से मुंह, नाक को ढकें और फिर उस पेपर को फौरन सावधानी से कचरे के डिब्बे में डाल दें.
2. अपने हाथों को लगातार साबुन से धोते रहें अपने घर, ऑफिस के दरवाजों के हैंडल, की-बोर्ड, मेज आदि साफ करते रहें यदि आपको जुकाम के लक्षण दिखाई दें तो घर से बाहर और दूसरों के नजदीक ना जाएं.
3. यदि आपको बुखार आई हो तो उसके ठीक होने के 24 घंटे बाद तक घर पर रहें. 
4. लगातार पानी पीते रहें ताकि डिहाइड्रेशन ना हो.
5. घर से बाहर निकल रहे हों तो फेसमास्क पहनकर ही निकलने की कोशिश करें.

स्वाइन फ्लू की आशंका होने पर क्या करें? 
अपनी तबीयत पर गौर करें और यदि आपको बुखार लग रही हो, खांसी आ रही हो, गले में जलन हो रहा हो और सांस लेने में तकलीफ हो रही हो तो तत्काल अपने शहर के नजदीकी अस्पताल में जाकर इसकी जांच करवाएं.

स्‍वाइन फ्लू के लक्षण
स्वाइन फ्लू के लक्षण वैसे तो तो सामान्य जुकाम जैसे ही होते हैं.
1. इस दौरान 100.4°F तक की बुखार आती है.
2. भूख कम हो जाती है और नाक से पानी बहता है.
3. कुछ लोगों को गले में जलन, उल्टी और डायरिया भी हो जाता है.
जिस किसी को भी स्वाइन फ्लू होता है उसमें उपरोक्त लक्षण जरूर दिखाई देते हैं.

फ्लू और सामान्य सर्दी में भेद कैसे करें? 
जब सामान्य सर्दी लगती है तो वह जल्द ही ठीक भी हो जाती है लेकिन फ्लू होने पर वह जल्दी ठीक नहीं होता और उसका प्रभाव अधिक घातक होता है. शरीर में कमजोरी आ जाती है, भूख नहीं लगती और बुखार आती-जाती रहती है. सरदर्द होता है और गले में जलन भी.


क्‍या न करें
1. भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक जगहों पर न जाएं.
2. बिना मास्‍क पहने अस्‍पताल में दाखिल न हों.
3. अनजान लोगों से हाथ मिलाने और गले मिलने से बचें.
4. खुली जगहों पर ना थूकें.
5. उन देशों का सफर ना करें, जहां स्वाइन फ्लू के मामले पाए गए हैं.
6. खांसते समय मुंह को ढंकना न भूलें.
7. खांसने, छींकने या नाक साफ करने के बाद आंख, नाक और मुंह पर हाथ कतई न लगाएं. शरीर के ये हिस्से सबसे जल्दी फ्लू की चपेट में आते हैं.

जशपुर

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By वाहिद खान

मनोरा। स्वच्छ शक्ति दिवस के अवसर पर जशपुर जिले के विभिन्न ग्राम पंचायतों में कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। स्वच्छाग्रही स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने ग्राम स्तर पर लोगों की विचार परिवर्तन एवं स्वच्छता के महत्व को बदलाने के लिए विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया। जिसमें स्वच्छाग्रहियों ने अपने गाँव में सार्वजनिक स्थलों, मार्गों, चौक-चौराहों, गाँव-गलियों को साफ किया।

इस कार्यक्रम में सफाई के साथ शत-प्रतिशत शौचालय के उपयोग के लिए घर-घर जाकर शौचालय का निरीक्षण एवं उसकी देखरेख साफ-सफाई के साथ नियमित उपयोग के लिए प्रेरित किया। जो व्यक्ति शौचालय होने के बावजूद खुले में शौच करने जा रहे हैं, उन्हें समझाईश दी गई कि सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी करना एक सामाजिक बुराई है। इससे हमारे बच्चों में बीमारियों का प्रादुर्भाव होता है। इसके अलावा स्वच्छाग्रही के द्वारा शालाओं आंगनबाड़ी केंद्रों में जाकर मध्यान्ह भोजन के समय बच्चों को साबुन से हाथ धुलाई कराई गई ताकि बच्चों में उल्टी दस्त टाइफाइड हैजा एवं क्रीमी की रोकथाम की जा सके। इसके साथ ही ग्राम पंचायत इचकेला में स्वच्छ संध्या का भी आयोजन किया गया, जिसमें ग्रामीणों ने सहभागिता निभाते हुए अपने ग्राम की स्वच्छता हमेशा बनाए रखने के लिए सम्मिलित हुए।

हेल्थ / लाइफस्टाइल

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रायपुर।  आजकल लोगों में नींद न आने की समस्या आम होती जा रही है। युवा से लेकर बुजुर्ग इस समस्या की चपेट में हैं। हाल ही में हुए एक शोध में सामने आया है कि औसतन लोग पांच से छह घंटे ही नींद ले पाते हैं। नींद न आने की समस्या के चलते कई लोग डिप्रेशन के भी शिकार हो जाते हैं और उन्हें इलाज करना पड़ता है।

नींद न आने की समस्या को अक्सर मनौवैज्ञानिक समस्या बताया जाता है लेकिन एक नए शोध के अनुसार कम पानी पीना भी अच्छी नींद न आने की वजह हो सकती है। इस शोध में बताया गया है कि अगर आप भरपूर नींद नहीं ले पा रहे हैं तो खूब पानी पिए। इससे आपकी अच्छी नींद आ सकती है। पेंसिल्वेनिया के पेन स्टेट यूनिवर्सिटी का कहना है कि जो लोग रात में छह घंटे की नींद लेते हैं वो आठ घंटे नींद लेने वालों के मुकाबले कम डिहाइड्रेड होते हैं और उन्हें पेशाब भी ज्यादा आती है।

इस शोध में अमेरिका और चीन के 20 हजार से ज्यादा प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इस स्टडी में भाग लेने वाले प्रतिभागियों के पेशाब और नींद के व्यवहार का विश्लेषण किया गया। शोध में सामने आया कि अगर आप छह ही घंटे की नींद लेते हैं तो इससे आपका हाइड्रेशन स्टेटस प्रभावित हो सकता है। शोध का कहना है कि अगर आप रात में भरपूर नींद नहीं ले पा रहे हैं और  अगले दिन थके हुए महसूस कर रहे हैं तो  ज्यादा मात्रा में पानी पिए। डिहाइड्रेशन की वजह से शरीर पर कई नुकसानदायक प्रभाव पड़ सकते हैं। इससे आपका सिर चकरा सकता है और सुस्ती महसूस कर सकते हैं। इसके अलावा आपके पेशाब में तेज गंध भी आ सकती है।

बस्तर संभाग

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By संतोष ठाकुर

जगदलपुर। जिला अस्पताल कोंडागांव में चार दिनों से भर्ती एक 9 माह की गर्भवती महिला को मंगलवार की देर रात रेफर कर दिया गया। महिला को मेडिकल कॉलेज ले जाया गया जहाँ ओपीडी में पहुंचते ही चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

मामले की जानकारी देते हुए परिजनों ने बताया कि कोंडागांव के ग्राम कोबरा में रहने वाला जयसिंह जो कृषि का काम करता है। जय सिंह के पहले से ही 3 बच्चे हैं, उसकी पत्नी रजुला चौथी बार गर्भवती हुई। रजुला के 9 माह होने के बाद उसे बेहतर उपचार के लिए कोंडागांव के जिला अस्पताल में 9 फरवरी को भर्ती किया गया था। 4 दिनों तक रजुला का इलाज करने के बाद चिकित्सकों ने उसे मेडिकल कॉलेज जगदलपुर रेफर कर दिया। चिकित्सकों द्वारा आखिरी समय में महिला को रेफर करने की जानकारी मिलने पर परिजन तत्काल 102 की मदद से महिला को कोंडागाँव से लेकर जगदलपुर मेडिकल कॉलेज पहुंचे। वहां जैसे ही महिला को ओपीडी ले जाया गया। ड्यूटी पर तैनात चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

परिजनों ने बताया कि 4 दिनों तक उपचार होने के बाद भी अन्तिम समय में रेफर करना उनकी समझ से परे था। चिकित्सक ना होना या डिलीवरी में होने वाली परेशानियों को भी लेकर वहां के आला अधिकारियों ने कोई भी जानकारी नहीं दी। जिसका नतीजा यह है कि जयसिंह की पत्नी के साथ ही पेट में पल रहा नवजात भी मौत की कोख में चला गया।

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