चर्चित उपन्यास ऑन द ओपन रोड की युवा लेखिका स्तुति चांगले से खास बातचीत



रायपुर। युवा लेखिका स्तुति चांगले इन दिनों चर्चा में हैं। उनका नावेल ऑन द ओपन रोड (on the open road) काफी पढ़ा जा रहा है और उसे सराहना मिल रही है। यह उपन्यास उनकी अपनी जिंदगी के अनुभवों पर आधारित है। वे इसके जरिए युवाओं से कहना चाहती हैं कि वे अपने दिल की बात सुनें और अपने सपने पूरे करें। वे खुद अपने लिए ढेर सारी चीजों की बजाय अनुभवों का खजाना जमा करने में यकीन रखती हैं।

लेखक बनना उनका बचपन का सपना था। सो एक दिन उन्होंने बैग उठाया और अपना सपना पूरा करने के लिए मुंबई छोड़ दिया। उन्होंने दुनिया घूमी, तरह तरह के लोगों से मिलीं और उनसे प्रेरणा ली। इस दौरान वे अंडमान गयीं, अरुणाचल में फौजियों के बीच रहीं, हिंद महासागर में स्कूबा डाइविंग का आनंद लिया, भूमध्यसागर में डॉल्फिनों के साथ तैरीं, प्राग की सड़कों पर बॉलीवुड के गानों पर डांस किया और मलोरका द्वीप के समुद्र में घंटों बिताए। वह अपने जीवनकाल में सारी दुनिया घूम लेना चाहती हैं।

स्तुति प्रतिष्ठित आईएमआई नई दिल्ली से पोस्ट ग्रैजुएट हैं। वे कंप्यूटर साइंस एंड टेक्नालॉजी की ग्रैजुएट भी हैं। वे कहती हैं- हम युवा देश का भविष्य हैं। और यह अपने मन की राह चुनने की समय है। हम उद्यमिता के जरिए भविष्य का भारत बनाएं। हममें से हर किसी के पास वह आइडिया है जो लाखों जिंदगियों को प्रभावित करने में सक्षम है। लिखना स्तुति का जुनून है और वे अपने लिखे को सारी दुनिया में फैलाना चाहती हैं।

किताब को पाठकों के बीच अच्छा रिस्पांस मिल रहा है। वे बता रहे हैं कि उनकी अपनी जिंदगी भी इस उपन्यास के पात्रों की जिंदगी से मेल खाती है। और किताब को पढ़कर वे खुद को खतरे उठाने और अपने सपनों को साकार करने के लिए जोश से भरा हुआ महसूस करते हैं। स्तुति इन दिनों अपनी नई किताब पर भी काम कर रही हैं। स्तुति को हाल ही में गुड़गांव में हुए गुड़गांव लिटरेचर फेस्टिवल एंड अवार्ड्स की फिक्शन कैटेगरी में मोस्ट प्रॉमिसिंग डेब्यू का सम्मान मिला है।

स्तुति छत्तीसगढ़ में जन्मी हैं। उनका जन्म तिल्दा में हुआ है। और उन्हें अपनी जन्मभूमि से खास लगाव है। यहां के जंगल, नदी, पहाड़, झरने उन्हें अपनी ओर खींचते हैं। वे सिरपुर के अवशेषों और रामगढ़ की प्राचीन नाट्यशाला समेत यहां के पुरातात्विक, ऐतिहासिक स्थलों को भी देखना जानना चाहती हैं।

स्तुति से हाल ही में की गई बातचीत के अंश

आपको अपनी नई किताब का आइडिया कहां से आया?

- मैं एक बड़े कार्पोरेट में काम कर रही थी। कैपेचीनो पीते हुए मैं अपने करिअर के बारे में सोच रही थी। पैसे तो मैं कमा रही थी लेकिन भीतर कुछ खालीपन सा था। दिल कहता था कि लेखक बनने का अपना सपना पूरा करो। दिमाग मुझे इस राह में आने वाले खतरों और नतीजों से आगाह करता था। मैंने अपने दिल की सुनी और उसके बाद अपने देश और यूरोप की यात्राओं पर निकल गई। इस दौरान मैं बहुत से लोगों से मिली जिनमें यात्री, उद्यमी, संत, कलाकार शामिल थे। इन लोगों ने मुझे प्रेरित किया। मेरे जीवन को दिशा दी। मैं अपनी कहानी के जरिए युवाओं को प्रेरित करना चाहती हूं। खुद को आजाद करो, कठिन रास्ते चुनो, खतरे उठाकर भी अपनी पसंद के काम को गले लगाओ, कभी हार मत मानो और खुद को तलाश करो।

आपको लिखने की प्रेरणा कैसे मिलती है?

- अपने आसपास की हर चीज मुझे प्रेरणा देती है। वह स्वादिष्ट चीज केक भी हो सकता है और खराब मौसम भी। इसी अहसास ने मुझे लेखक बनने के लिए प्रेरित किया।

नए लेखकों को आप क्या मश्वरा देना चाहेंगी?

- खुद पर और अपने काम पर भरोसा रखें। प्रकाशक आपकी किताब छापने से मना कर दें तो दुखी न हों। जैसे कलाकारों के लिए यू ट्यूब है वैसे ही लेखकों के लिए सेल्फ पब्लिशिंग है। अगर आपने अपना काम दिल लगाकर किया है तो वह लाखों दिलों तक पहुंचेगा।

लेखक होने का सबसे बडा सुख क्या है?

- मैं अलग अलग चरित्रों को जीती हूं। कभी मैं यात्री होती हूं, कभी उद्यमी, कभी गायिका, कभी नृत्यांगना, कभी छात्रा, कभी हत्यारी भी। हालांकि मैं हिसा करने की सलाह नहीं दूंगी। लेखक होकर मैं मनचाहे चरित्रों को जीती हूं।

लेखक के जीवन में वे पल भी आते हैं जब लिखने का कुछ नहीं होता। ऐसे में क्या करती हैं?

- दिल से मैं एक यात्री हूं। ऐसे मौकों पर मैं हिमालय की ओर निकल जाती हूं। या फिर गोवा। वैसे सबसे बढ़िया तरीका तो यह है कि जैसे ही कोई आइडिया दिमाग में आए, उसे लिखते चलना चाहिए।

छत्तीसगढ़ में जन्मी हूं, यह मुझमें रचा बसा है: स्तुति

छत्तीसगढ़ से आपका आत्मीय संबंध है। इस बारे में कुछ बताएं।

- छत्तीसगढ़ मेरी जन्म स्थली है। रायपुर के पास तिल्दा में मेरा जन्म हुआ है जो मेरे यहाँ से जुड़े होने की सबसे बड़ी वजह है। साथ ही साथ नानी और मामा का घर रायपुर और दुर्ग में होने से हर साल गर्मी की छुट्टी में छत्तीसगढ़ आना होता रहा जो आज भी जारी है।

आप एक ट्रैवलर हैं। दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में घूमी हैं। क्या छत्तीसगढ़ को भी घूम कर देखना चाहेंगी?

- छत्तीसगढ़ मेरे जहन में रचा बसा है क्योंकि बचपन का बहुत सा वक़्त मैंने यहाँ बिताया है। माँ हमेशा खैरागढ़, केशकाल, भोरमदेव, डोंगरगढ़, चित्रकोट जैसी जगहों के बारे में बताती रहती हैं। मौका मिलते ही मैं छत्तीसगढ़ की इन सभी जगहों पर जा कर इनके बारे में अपनी डायरी में अपने लफ़्ज़ों में लिखना चाहूंगी।

खासतौर पर आप यहां कौन सी जगहें देखना चाहेंगी?

मैंने केशकाल, चित्रकोट, भोरमदेव और विशेष रूप से सिरपुर के बारे में बहुत कुछ सुना है और निकट भविष्य में इन जगहों को देखना चाहूंगी। मैं यहाँ की प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक वैभव को आत्मसात करना चाहती हूँ कि मैं अगली किताब में इनको जगह दे सकूँ।