महासमुंद

हेल्थ / लाइफस्टाइल

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रायपुर। सुबह 9 बजे के बाद से ही तेज धूप और गर्मी के चलते बाहर निकलने वाले लोगों का सिर चकराने लगा है। राजधानी समेत प्रदेशभर में गर्मी 44 डिग्री के आसपास पहुंचने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने गुरुवार को लू का एलर्ट भी जारी कर दिया है। इधर, गर्मी बढ़ने की वजह से प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अंबेडकर अस्पताल में पिछले तीन दिन से लू के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है।

महासमुंद में लू से एक व्यक्ति की मौत

बता दें कि कल लू के 20 मरीज अस्पताल पहुंचे। अस्पतालों को उल्टी-दस्त के लिए भी सतर्क रहने को कहा गया है। वहीं पिछले हफ्ते महासमुंद में लू से एक व्यक्ति की मौत होने की खबर है। बिलासपुर संभाग में पारा 45 डिग्री के करीब पहुंच गया है।

राजधानी समेत रायपुर और दुर्ग संभाग में दोपहर की गर्मी 44 डिग्री या इसके आसपास है। बस्तर में ही अभी सबसे कम गर्मी है, लेकिन वहां भी तापमान औसतन 40 डिग्री से ऊपर है और सामान्य से एक-दो डिग्री ज्यादा ही है। इसलिए राज्यभर में लू या हीट स्ट्रोक और डिहाइड्रेशन के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। सरकारी अस्पतालों ही नहीं, निजी अस्पतालों में भी लू के मरीज पहुंचने लगे हैं। इसीलिए लू का एलर्ट जारी किया गया है।

कार्यकर्ताओं के पास हो दवा

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार लू कभी-कभी जानलेवा हो जाती है, इसलिए इसका तुरंत बचाव जरूरी है। यह तभी संभव है जब अस्पतालों ही नहीं, स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और मितानिनों के पास भी जीवनरक्षक दवाइयों का स्टॉक रहे। अलग-अलग इलाके में तापमान में अंतर रहता है, इसलिए सूचना तंत्र डेवलप किया जाए, ताकि तुरंत राहत मुहैया कराई जा सके।

अलर्ट जारी

लू के एलर्ट के साथ विभाग ने प्रदेश के सभी अस्पतालों को लू के इलाज के लिए पर्याप्त दवाइयां रखने के निर्देश दिए हैं। हर अस्पताल में चौबीसों घंटे डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की उपस्थिति अनिवार्य कर दी गई है।

लू के लक्षण

बहुत तेज बुखार, पसीना नहीं निकालना, सिर तथा हाथ-पैर में दर्द, त्वचा लाल होना और चक्कर-बेहोशी।

क्या होता है लू लगना 

मानव शरीर के भीतर का सामान्य तापमान 37 डिग्री (98. 6 फारेनहाइट) होता है। जब बाहर तापमान 40 डिग्री (104 फारेनहाइट) या ज्यादा होता है, तब लू लगने की आशंका बढ़ जाती है। बच्चे, बुजुर्ग, हृदय और डायबिटीज रोगियों को खतरा ज्यादा रहता है।

लू लगने के कारण

  • शरीर के वाइटल आर्गन जैसे किडनी, लीवर व ब्रेन सामान्य ढंक से काम करना बंद कर देते हैं।

  • ब्लड मेें मौजूद प्रोटीन का थक्का जमने लगता है, इससे शरीर में खून की सप्लाई प्रभावित होती है।

  • मरीज बेहोश होने लगता है। बीपी कम और पसीना ज्यादा आने से पानी कम हो जाता है।

  • लू लगने पर किडनी फेल हो जाती है। यूरीन बनना बंद हो जाता है। शरीर में विषैले तत्व बढ़ने लगते हैं।

  • ऐसे में ओआरएस फायदेमंद

ऐसे बरतें सावधानी

लू में ओआरएस फायदेमंद है। इसे एक गिलास पानी में चुटकीभर नमक व इतनी ही शक्कर घोलकर घर में बना सकते हैं। बहुत जरूरी न हो तो दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक धूप में निकलना से बचना चाहिए। बाहर खाली पेट न जाएं, पानी भी भरपूर पी लें। शरीर को ढंकें और हल्के रंग के सूती कपड़े पहनें। हर आधे घंटे बाद 10 मिनट के लिए छांव में जाएं। नशीले पदार्थों और चाय-काफी से बचें।

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